आरती श्री दुर्गा जी की – Aarti Shree Durga Ji Ki

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

#AARTI

9/25/2024

आरती श्री दुर्गा जी की

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ जय ॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्जवल से दोउ नयना, चन्द्रबदन नीको ॥ जय ॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्त पुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै ॥ जय ॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।

सुर-नर मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ जय॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति ॥ जय ॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती ॥ जय ॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु कैटभ दोउ मारे, सुर-भय हीन करे ॥ जय ॥

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम-निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ जय ॥

चौंसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरूं।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ॥ जय ॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्तन की दुःख हर्ता, सुख सम्पत्ति करता ॥ जय ॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥ जय ॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्री मालकेतु में राजत, कोटिरतन ज्योति ॥ जय ॥

मां अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पति पावे ॥ जय ॥