करवा चौथ 2024: करवा चौथ पर 21 मिनट तक रहेगी भद्रा, इस दौरान सुहागिनें न करें ये काम

10/19/2024

करवा चौथ का महत्व

करवा चौथ एक पवित्र हिन्दू त्यौहार हैऔर कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष, करवा चौथ लगभग 20 अक्तूबर, 2024 को मनाया जाएगा। इस दिन, विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन को बनाए रखने केलिए निर्जला व्रत रखती हैं जिसका पारण चांद निकलने पर किया जाता है।, जो विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पतियों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है और इसका धार्मिक महत्व अति गहन है। करवा चौथ का आयोजन कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस दिन, महिलाएं पूरे दिन उपवासी रहकर चंद्रोदय के समय पूजा करती हैं।

इस त्यौहार की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जहाँ महिलाएं अपने पति की भलाई और स्वस्थ जीवन के लिए उपवास करती हैं। मान्यता के अनुसार, जिसे "करवा" कहा जाता है, वह पानी से भरा एक बर्तन है, जिसका उपयोग पूजा में किया जाता है। इस बर्तन का प्रतीकात्मक अर्थ है कि महिलाएं अपने पति के जीवन में सुख और समृद्धि लाने का प्रयास कर रही हैं। करवा चौथ पर महिलाएं विशेष तौर पर साज-श्रृंगार करती हैं और अपने पतियों के लिए दिनभर उपवास रखती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि करवा चौथ के दिन महिलाओं की सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें वे एक-दूसरे के साथ मिलकर इस त्यौहार की धूमधाम को साझा करती हैं। यह त्यौहार न केवल वैवाहिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि यह महिलाओं के एकजुटता और भाईचारे का भी संकेतिक है। इस प्रकार, करवा चौथ धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ सांस्कृतिक परंपराओं का भी आकर्षक मिश्रण प्रस्तुत करता है, जो इसे समय की कसौटी पर खरा उतारता है।

भद्रा का समय और इसकी विशेषताएँ

भद्रा एक महत्वपूर्ण तिथि है, विशेषकर भारतीय परंपरा में, जो कई त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों के संदर्भ में ध्यान केंद्रित करती है। भद्रा को एक प्रकार की नकारात्मकता या अशुभता के प्रतीक के रूप में माना जाता है, और इसे विशेष रूप से पूजा-पाठ के समय में ध्यान में रखा जाता है। भद्रा लगने का समय ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को शुभ माना गया है। कहा जाता है कि भद्रा शुभ कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है। इस वर्षकरवा चौथ पर 20 अक्तूबर को 21 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा। करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ समय 20 अक्तूबर 2024 को शाम 5:46 बजे से शुरू हो रहा है। यह शुभ मुहूर्त 19:02 तक रहेगी। करवा चौथ के दिन भद्रासुबह 06:24 से 06:46 तक रहती है। करवा चौथ व्रत की शुरुआत भद्रा काल शुरू होने से पूर्व ही हो जाएगी। ऐसे मेंव्रती सूर्योदय से पहले स्नान कर सरगी ग्रहण कर लें और व्रत का संकल्प ले लें। करवा चौथ जैसे अनुष्ठान में जहां सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए उपवास रखा जाता है, भद्रा का समय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2024 में, भद्रा का समय करवा चौथ के दिन 21 मिनट तक रहेगा।

भद्रा का समय मुख्य रूप से चंद्रमा के उठने से संबंधित है, और इसे अमावस्या या पूर्णिमा के दिनों में प्राप्त किया जा सकता है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों को निष्फल माना जाता है, इसलिए इस समय में पूजा-पाठ से दूर रहना चाहिए। सुहागिनों को विशेष रूप से सलाह दी जाती है कि वे इस अवधि में अपने उपवास करने से बचें, क्योंकि यह न केवल उनके व्यक्तिगत अनुष्ठान बल्कि उनके पतियों के स्वास्थ्य के लिए भी अनिष्टकारी हो सकता है।

2024 में करवा चौथ के अवसर पर भद्रा का समय महिलाओं द्वारा अनुष्ठान में बाधा डाल सकता है, जिससे उनकी पूजा के प्रभाव में कमी आ सकती है। यह सचेत रहना महत्वपूर्ण है कि भद्रा के अंतर्गत आए समय के दौरान कोई भी पूजा या आराधना आयोजित नहीं की जानी चाहिए। इसके विपरीत, यह स्त्रियों को सलाह दी जाती है कि वे भद्रा समाप्त होने के बाद अपनी पूजा और व्रत को संपन्न करें, जिससे अधिक लाभ प्राप्त हो सके। भद्रा की यह विशेषता त्योहार की पारंपरिक महत्ता को बनाए रखने में सहायक है।

इस दौरान कौन-कौन से काम ना करें

करवा चौथ पर ब्राह्मणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा के समय में कुछ विशेष कामों को करने से बचना चाहिए। भद्रा एक अशुभ काल माना जाता है, और इसकी अवधि में अगर कोई विशेष कार्य किया जाए तो उसे न केवल अशुभ माना जाता है, बल्कि उससे पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस संदर्भ में सुहागिन महिलाओं को कुछ खास कामों से बचना चाहिए।

सबसे पहले, भद्रा के समय में किसी भी प्रकार के ताजगी या कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। यह माना जाता है कि इस वक्त कार्य करने से उसमें विघ्न आ सकता है और परिणाम सामान्य से नकारात्मक हो सकते हैं। इसके अलावा, महिलाएं इस मुद्रा में खाना पकाने से भी दूर रहें। खाना पकाने के समय में भद्रा का प्रभाव खाना के स्वाद और उसकी गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है।

इसके अलावा, इस समय में नए कपड़े खरीदना या पुराने कपड़ों को फेंकना भी अशुभ माना जाता है। भद्रा की अवधि के दौरान ये क्रियाएँ पति-पत्नी के रिश्ते में विवाद या मनमुटाव का कारण बन सकती हैं। इसी प्रकार, भद्रा के दौरान पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक कार्यों को भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना पूजा के फल को नकारात्मक दिशा में ले जा सकता है।

इन सभी मान्यताओं का पौराणिक आधार है और इसे धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुहागिनें इस समय अलाग रखा जाता है। इसलिए, इस करवा चौथ पर भद्रा के दौरान इन कामों से दूर रहकर, महिलाओं को सुख और समृद्धि सुनिश्चित करनी चाहिए

करवा चौथ व्रत वाले दिन सुहागिनें अपने श्रृंगार में सफेद और काले रंग की वस्तु का प्रयोग करें। सुहागिनमहिलाएं यदि करवा चौथ पर इन रंगों का उपयोग करती हैं तो उनके जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़सकता है। भद्रा काल के दौरान कोई संपत्ति या व्यापार की शुरुआत या निवेश करें। करवा चौथ पर पूजा के बाद जब भी कोई श्रृंगार की वस्तु बच जाती हैं, तो उसे इधर उधर फेंकें, बल्कि उसेकिसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें। इस दिन धारदार चीजों के इस्तेमाल से बचें। साथ ही किसी से कोई भी मनमुटाव रखें और अपशब्द कहें। व्रत पारण करने के बाद तामसिक भोजन ग्रहण करें।

करवा चौथ की पूजा विधि

करवा चौथ के दिन चंद्रोदय और शुभ मुहूर्त: करवा चौथ के दिन चतुर्थी प्रारंभ सुबह 06.46 से (20 अक्तूबर) और चतुर्थी का समापन सुबह 04.17 बजे से (21 अक्तूबर)। करवा चौथ व्रत समय सुबह 06.46 से रात 07.56 मिनट तक रहेगा। व्रत की अवधि 13 घंटे 10 मिनट। करवा चौथ पूजा मुहूर्त शाम 5.50 से 7.05 तक रहेगा। यह मुहूर्त करवा चौथ व्रत कथा पढ़ने या सुनने के लिए भी उत्तम रहेगा। करवा चौथ का चांद निकलने का समय- 20 अक्तूबर 2024, रविवार को चंद्रोदय रविवार रात 07:56 बजे होगा।

करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुहागिनें अपने पतियों की लंबी उम्र और सुखद दाम्पत्य जीवन के लिए उपवास रखती हैं। इस पावन अवसर पर पूजा विधि का पालन करना आवश्यक है, जो इस दिन की धार्मिकता और महत्व को दर्शाता है। सबसे पहले, पूजा की तैयारी के लिए कई सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इनमें एक करवे, चावल, फल, पूजा थाली, तथा सिंदूर शामिल होते हैं।

पूजा का समय सवेरे सूर्योदय से पहले शुरू होता है। इस दिन महिलाएँ निर्जला उपवास रखती हैं और संतान के सुख की कामना करती हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद, चाँद निकलने पर विशेष पूजा की जाती है। इस अवसर पर महिलाएँ खाना पकाने से पहले अपने किसी पवित्र स्थान पर दीप जलाकर, करवा चौथ की कथा का श्रवण करती हैं। इसके बाद, चाँद के दर्शन करने के समय व्रति विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हुए अपने पति के लिए आरती उतारती हैं।

आरती के बाद, महिलाएँ चाँद को अपने करवे में देखकर, अपने पति का चेहरा करवे के माध्यम से देखने का प्रयास करती हैं। पति को इस दौरान पानी और भोजन का भोग अर्पित कर, व्रति अपनी प्रार्थनाएं करती हैं। पूजा के समापन पर, सुहागिनें अपने पति के साथ संतान सुख की कामना हेतु कुछ प्रार्थनाएँ भी करती हैं। इस प्रकार, करवा चौथ की पूजा विधि न केवल धार्मिक होती है, बल्कि यह दांपत्य जीवन में प्रेम और समर्पण की मिसाल भी प्रस्तुत करती है।

रविवार को करवा चौथ की तैयारियाँ

करवा चौथ भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र और सुखद दांपत्य जीवन की कामना के लिए मनाती हैं। इस दिन की तैयारी का आरंभ रविवार से ही होना चाहिए, ताकि हर चीज़ अच्छी तरह से व्यवस्थित हो सके। सबसे पहले, रेशमी साड़ी जो इस पर्व के लिए विशेष रूप से चयनित की गई है, उसका चयन करना आवश्यक है। हल्के रंगों और आभायुक्त साड़ियों का चुनाव करना शानदार रहता है।

इसके बाद, हाथों में मेहंदी लगाने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। मेहंदी केवल एक सजावट नहीं है, बल्कि यह शुभता और समृद्धि का प्रतीक भी मानी जाती है। अधिकतर महिलाएँ अपने हाथों और पैरों पर खूबसूरत पैटर्न बनवाने के लिए समय निर्धारित करती हैं। मेहंदी लगवाने के बाद, इसके सूखने तक धैर्य रखना आवश्यक होता है, जिससे रंग गहरा और सुंदर हो।

सिर्फ साड़ी और मेहंदी तक सीमित नहीं रहना चाहिए; इस दिन की तैयारी में पूजा सामग्री, जैसे कि करवा, पानी, चूड़ियाँ और श्रृंगार के सामान की खरीदारी भी आवश्यक है। यह सुनिश्चित करें कि सभी सामान पहले से जुटा लिए जाएं ताकि पर्व के दिन कोई कमी न रहे। अगर परिवार में किसी और सुहागिन का भी करवा चौथ है, तो उनके साथ मिलकर सभी जरूरी सामग्रियों का प्रबंधन किया जा सकता है।

इस प्रकार, रविवार को शुरू की गईं ये तैयारियाँ करवा चौथ को विशेष और यादगार बनाने में मदद करेंगी। उचित योजना और समय प्रबंधन से महिलाएँ इस महत्वपूर्ण दिन को खुशी और उल्लास के साथ मनाने में समर्थ होंगी।

भद्रा के समय में अन्य वैकल्पिक पूजा विधियाँ

करवा चौथ जैसे पवित्र पर्व के दौरान भद्रा के समय का प्रभाव हमारी पूजा विधियों और उनके फल पर पड़ता है। इस विशेष समय के दौरान, हालांकि कुछ पारंपरिक पूजा विधियों से बचने की सलाह दी जाती है, महिलाएँ विभिन्न वैकल्पिक पूजा विधियों का पालन कर सकती हैं ताकि वे अपनी आत्मिक और मानसिक शांति को प्राप्त कर सकें। इन विधियों में ध्यान, जप, और अन्य साधन शामिल होते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

इस समय के दौरान महिलाएँ संकल्प करके अपने पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर सकती हैं। एक साधारण ध्यान या प्राणायाम का अभ्यास करके वे न केवल अपने मन को शांत कर सकती हैं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक क्षमता को भी बढ़ा सकती हैं। नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहने के लिए, यह सलाह दी जाती है कि महिलाएँ प्राकृतिक तत्वों जैसे कि जल, कंदमूल या पुष्प का उपयोग करके छोटे पवित्र स्थान बनाएं और वहां अपनी इच्छाएँ प्रकट करें।

जप करने की भी एक लोकप्रिय विधि है। इस समय में महिलाएँ विशेष मंत्रों का जाप कर सकती हैं, जैसे 'ॐ पार्वती पतये नमः' या 'ॐ सिरी कांताय नम:', जो उनके मन की शांति और सच्चे प्रेम का संचार करते हैं। इसके अलावा, भद्रा के समय में महिलाएँ अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर कुंवारी बेटियों के लिए विशेष आशीर्वाद का आयोजन भी कर सकती हैं, जो उनके जीवन में प्रेम और सौभाग्य लाने का प्रतीक बनता है। इस तरह की पूजा विधियाँ न केवल संयम और एकाग्रता का विकास करती हैं, बल्कि करवा चौथ के पर्व की गरिमा को भी बनाए रखती हैं।

उपसंहार: करवा चौथ पर विशेष टिप्स

करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और सुखद दांपत्य जीवन के लिए व्रत करती हैं। इस अवसर पर कुछ विशेष टिप्स को ध्यान में रखना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आपकी तैयारी और अनुभव को भी बेहतर बना सकता है।

सबसे पहले, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्रत की तैयारी सही समय पर कर ली गई है। व्रत का नियम यह है कि सूर्योदय से पूर्व उठकर उपवासी रहना चाहिए। इसके लिए रात को खाना खाकर अपने मन को दृढ़ बनाएं। इस दिन विशेष खाद्य सामग्री जैसे साज-सज्जा के लिए फलों, नट्स, और विशेष पकवानों का इस्तेमाल करें।

भद्रा काल का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि 2024 में करवा चौथ पर यह 21 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कुछ विशेष कार्य न करने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक क्रियाकलापों से बचना बेहतर होता है। इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी और पूजा की प्रक्रिया निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सकेगी।

सजावट के लिए घर में दीप, रंगोली और फूलों का प्रबंध करें ताकि वातावरण में उत्सव का माहौल बना रहे। इसके अलावा, भद्रा के समाप्त होते ही अपने पति के साथ एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सहानुभूति का प्रदर्शन करें। यह दिन आपको और आपके जीवनसाथी को एकजुट करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

याद रखें, करवा चौथ के व्रत का मुख्य उद्देश्य प्रेम और समर्पण का प्रतीक बनना है। इस दिन को सही और मनोहर ढंग से मनाने से आपके दांपत्य जीवन में खुशी का संचार होगा।